Home » मध्यप्रदेश हिन्दी न्यूज़ » वर्षा ऋतु के मद्देनजर जिला आपदा प्रबंधन की बैठक में पूर्व तैयारियों के लिये दिए निर्देश

वर्षा ऋतु के मद्देनजर जिला आपदा प्रबंधन की बैठक में पूर्व तैयारियों के लिये दिए निर्देश

संभावित बाढ़ एवं जल भराव क्षेत्रों में रहे कड़ी नजर – कलेक्टर

जिला आपदा प्रबंधन
जिला आपदा प्रबंधन

राजगढ़ – संभावित बाढ़, जलभराव क्षेत्र, जलाशय, डेम एवं नदी के खतरनाक स्थलों पर कड़ी नजर रखने पूर्व तैयारियां की जाएं। ऐसे स्थलों का चिन्हांकन हो, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी क्षेत्रीय भ्रमण करें। यह निर्देश कलेक्टर श्री कर्मवीर शर्मा द्वारा जिला आपदा प्रबंधन योजना की बैठक में दिए गए। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री ऋशव गुप्ता, अपर कलेक्टर श्रीमती भाव्या मित्तल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नवल सिंह सिसोदिया सहित जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, समस्त विभागों के कार्यालय प्रमुख, जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, तहसीलदार, नगरीय निकायों मुख्य नगर पालिका अधिकारी मौजूद रहे।
उन्होंने वर्षा ऋतु में नदी, जलाशयों एवं मोहनपुरा तथा कुडालियां डेम में जलभराव एवं बेक वाटर के प्रभावों से जन-धन क्षति नही हो, के उद्देश्य से प्रभावी रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने होम गार्ड कमान्डेंट को कण्ट्रोल रूम स्थापित करने, मोटर बोट की उपलब्धता सुनिश्चित करने एवं वाहन पर लोडेड रखने, सिविल ड्रेस स्वयंसेवको को प्रशिक्षण देकर स्वयंसेवको की एक फौज तैयार करने तथा राजगढ जिले एवं पडोसी जिलों के गोताखोरों की जानकारी रखने, पुलिस विभाग को पुनर्वास के विरोध से उत्पन्न हाने वाली कानून व्यवस्था की स्थिति का आंकलन कर तैयार करने एवं सूचना प्रबंधन, परिवहन विभाग को बाढ़ प्रभावित मार्गो का डायवर्सन एवं ट्रैफिक व्यवस्था, मुख्य नगर पालिका अधिकारियों नगर परिषद् एवं नगर पालिका को नाले-नालियों में कचरा भर जाने एवं पॉलिथिन से नालियॉ अवरूद्ध हो जाती है को देखते हुए सफाई व्यवस्था 15 जून 2018 तक पूर्ण कराया जाने, नदी नालों में अतिक्रमण हटाने ताकि बाढ़ की स्थिति में कोई अप्रिय घटना न घटे, जल स्त्रोत, हेंडपंप बाढ के कारण जनमग्न होने की स्थिति में अतिरिक्त जल स्त्रोतों का पहले ही चयन करने, जल स्त्रोतो में क्लोरीन, ब्लीचिंग पाउडर डलवाने की व्यवस्था करने, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायतों को मोहनपुरा-कुण्डालिया परियोजना क्षेत्र में एस डी एम की अध्यक्षता में वर्कशॉप कर सभी सचिव, सरपंच, ग्राम रोजगार सहायक को डूब क्षेत्र के संबंध में सूचित कर ग्राम स्तरीय रिसोर्स टीम का गठन करने, ग्राम स्तरीय सूचना प्रबंधन एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था करने, नदी से बाढ़ में प्रभावित ग्रामों में उचाई का स्तर चयन कर शिविर हेतु व्यवस्था करने, जिला स्तरीय कट्रोल रूम में दूरभाष नम्बर 07370-255067 स्थापित करने प्रभारी अधिकारी अधीक्षक को बनाने, कलेक्ट्रेट अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं तहसीलदारों को पूर्ण डूब-बाढ प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण एवं निरीक्षण, नालों नदियों को चिन्हित करना, पुल-पुलिया जो जल मग्न होने उनका आंकलन कर अतिरिक्त रस्ते निर्धारित किए जाने, ग्राम वार रूट चार्ट भी तैयार करने, जिले की समस्त तहसीलों में तहसील स्तर पर कन्ट्रोल रूम एवं नियत्रंण कक्ष निर्धारित बनाने, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं तहसीलदार अनुविभाग स्तर पर एक वर्कशॉप 15 जून से पहले एवं जनपद एवं नगरीय निकाय के कर्मचारियों के साथ बैठक करने, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, चौकीदार बैठक में रहे एवं बाढ़, डूब की पूर्व पूरी तैयारी करने,
जनपद नगर परिषद् के भी डूब में आने वाले क्षेत्रों का चिन्हांकन करने, वैकल्पिक व्यवस्था हेतु आश्रय स्थल का चयन करने एवं आवश्यक व्यवस्था बनाने, जल संसाधन विभाग को जलाशयों से नियंत्रित रूप निकासी के प्रयास करने जल छोड़ने से पहले स्थनीय लोगो को एवं जिला नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे पूर्व सूचना देने, सभी नदी, नालों के जल स्तर पर बराबर नजर रखने और जल स्तर को खतरे के निशान पर पहुंचने की संभावना पर सूचना देने तथ सीहोर एवं शाजापुर में वर्षा होने की स्थिति में पानी राजगढ़ में भी पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन कर सूचना जिला नियंत्रण कक्ष में देने तथा सभी जलाशयों के सुधार कार्य सुचारू रूप से कराए जाने के निर्देश दिए।
उन्होंने पशु पालन विभाग को पशुओं में भूजन्य रोग जैसे व्ही.क्यू., एच.एस., एंथ्रेक्स आदि के प्रतिबंधात्मक टीके वर्षा ऋतु आने के पूर्व लगाने, भूजन्य एवं सामान्य रोगो के उपचार हेतु पर्याप्त औषधियों का भंडारण करने तथा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से संपर्क कर शिविर स्थल पर पशु आहार, चारा, औषधि आदि की व्यवस्था करने, वन विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र डूब क्षेत्र में बाढ़ आने पर पशुओं को वन में चराने में पशु विभाग का सहयोग करने एवं विभाग को आवश्यक अनुमति देने, पशु विभाग को घांस के भंडारण में आवश्यक सहयोग करने, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को डूब, बाढ़ प्रभावित ग्राम में जीवन रक्षक दवाईयों की व्यवस्था रखने, क्लोरीन, ब्लीचिंग पाउडर पेयजल स्त्रोतों में डालने हेतु व्यवस्था एवं जागरूकता करना जिससे बीमारियों को नियंत्रित किया जा सके, मेडिकल टीम का गठन कर सर्व चिकित्सा एवं संक्रामक रोगो एवं महामारियों की रोकथाम सुनिश्चित करने, जलजनित बीमारियों से संबंधित दवाईयां समस्त स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ पहली वर्षा में जहरीले जीव-जंतुओ के निकलने एवं काटने की घटनाएं हो सकती है, के मद्देनजर आवश्यक दवाईयां रखने एवं संबंधितों को इसके उपयोग का प्रशिक्षण देने, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को बाढ संभावित डूब क्षेत्र में पेयजल हेतु पेयजल स्त्रोतों को चिन्हाकित करने, कितने हेडपंप बोर डूब में आएंगे यह आंकलन कर सूची उपलब्ध कराने तथा पेयजल स्त्रोतों में क्लोरीन की गोलिया, ब्लीचिंग पाउडर डालने हेतु उपलब्ध कराए जाने, जिला आपूर्ति विभाग को जहां बाढ़ की स्थिति में राशन नहीं पहुंचाया जा सकता है, वहां पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न सामग्री 15 जून 2018 तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *